साक्षात्कार: अरविंद कुमार साहू

अरविन्द कुमार साहू जी विगत तीन दशकों से पत्रकारिता और गल्प-साहित्य-लेखन में सक्रिय हैं।

बालसाहित्य लेखन में अरविंद साहू जी की विशेष रुचि है।  नंदन, चंपक, बालहँस, बालभारती, पराग, नन्हे सम्राट समेत देश की सभी प्रमुख बाल पत्रिकाओं के लिए अरविंद जी पिछले 35 वर्षो से वर्तमान समय तक से बालकथायें लिखतें आ रहें है।

बाल-साहित्य को दिए अपने अभूतपूर्व योगदान के लिए उत्तरप्रदेश सरकार ने हाल ही में साहू जी को पण्डित लल्ली प्रसाद पांडेय बालसाहित्य पत्रकारिता सम्मान व पुरस्कार से सम्मानित किया है ।

बालसाहित्य लेखन के अलावा अरविंद जी काव्यलेखन , काव्यपाठ व वाचन में भी रुचि रखते हैं, और अनेको साहित्यिक सम्मेलनों में काव्यपाठ भी कर चुकें हैं।

 आज के इस साक्षात्कार में हम रूबरू होंगे अरविन्द  कुमार साहू जी से, और जानेंगे उनकी साहित्यिक यात्रा से सम्बंधित कुछ तथ्य ।

साक्षात्कार, अरविंद कुमार साहू
IMMAGE SOURCE; FACEBOOK/ ARVIND KUMAR SAHU



अरविंद जी ! सर्वप्रथम पण्डित लल्ली प्रसाद पांडेय बालसाहित्य पत्रकारिता सम्मान व पुरस्कार- के लिए बधाई और आशा करता हूँ कि आपकी कलम यूं ही चलती रहेगी, और अपनी कहानियों के माध्यम से नई पीढ़ी को आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

Qअरविंद जी ! हालांकि आपके नाम और काम से अधिकांश पाठक भली-भांति परिचित है, लेकिन फिर भी साक्षात्कार की शुरुआत करते हुए अपने बारे में कुछ बताइये, कहाँ से है आप ? क्या करते हैं?

A1- मेरा जन्म पंद्रह अक्तूबर उन्नीस सौ उनहत्तर ईस्वी को उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव पूरे शिवसहाय मजरे जनवामऊ, जनपद प्रतापगढ़ में हुआ था | बाद में मेरा परिवार पास के  पाइकगंज बाजार (परियावाँ) कस्बे में आकर बस गया | यहीं प्राइमरी से लेकर आठवीं तक पढ़ाई हुई | उन दिनों उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बहुत कम मिलते थे | चूँकि पढ़ाई में मुझे रुचि थी, सो 1982 में आगे की पढ़ाई के लिए रोज साइकिल से लगभग पंद्रह किमी दूर जाना-आना पड़ा | मेरे कस्बे में अखबार व पत्रिकाएँ आते थे, जिन्हें मैं रोज पास के होटल पर जाकर पढ़ा करता था | फिर कुछ बाल पत्रिकाएँ, कॉमिक्स व पॉकेट बुक्स भी पढ़ने को मिली | पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए मैंने अखबार व थोक – फुटकर पत्रिकाएँ भी बेची | ये सब पढ़ते– करते ही  लिखने की रुचि भी जागृत हुई और बारहवीं पास करते- करते मेरी फुटकर रचनाएँ यत्र – तत्र छपने लगी थी | 


Q आप लगभग 35 सालों से साहित्य की सेवा करते आ रहें है, और साथ मे पत्रकारिता से भी जुड़े हुए है। देश-विदेश की यात्राएं भी की हैं और साहित्य से जुड़े कई सम्मान भी पाए। बाल सहित्य के प्रति आपका झुकाव कैसे हुआ? कहाँ से प्रेरणा मिली आपको?

A2- 1980-90 के आसपास का दौर पत्र- पत्रिकाओं व किताबों का स्वर्णिम युग था | ग्यारहवीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान 1985 में पहली प्रकाशित रचना संभवतः एक लघुकथा – ‘सर्प और मानव’ थी, जो अलीगढ़ की एक लघुपत्रिका ‘जर्जर कश्ती’ में छपी थी | इसके बाद सिलसिला चलता गया | 1989 में स्नातक पास करने तक मैं कई बड़े समाचारपत्रों जैसे दैनिक जागरण, अमृत प्रभात, दैनिक भास्कर तथा अनेक बाल पत्रिकाओं जैसे नन्हें सम्राट, बालहंस, बालभारती, पराग, सुमन सौरभ, अच्छे भैया, गुगली तथा बड़ों की पत्रिकाओं सूरज समाचार-विचार, निर्भय पथिक, नवनीत, सानुबंध आदि में खूब छपने लगा था | 

       चूँकि उस दौर में लेखकों को नाम-यश व मानदेय भी अच्छा मिलता था, सो रुचि भी बढ़ती गयी | कालेज की लाइब्रेरी में अनेक बड़े रचनाकारों को पढ़ा और अनुभव किया/ सीखा | मैंने कविता, कहानी, लेख, नाटक आदि अनेक विधाओं में लिखा, न्यूज व फीचर रिपोर्टिंग भी किया | लेकिन बचपन में पढ़ी उत्कृष्ट बाल पत्रिकाओं और कॉमिक्स आदि के प्रभाव के कारण सर्वाधिक रुचि बालसाहित्य के प्रति ही रही, जो आज तक कायम है | 

Q  बालसाहित्य लेखन में रिसर्च को कितना महत्व देते है आप? साधारण साहित्य के मुकाबले बालसाहित्य लिखने में किस तरह की चुनोतियाँ का सामना करना पड़ता है।

A3- साहित्य लेखन में रिसर्च आपको कुछ नया करने को प्रेरित करता है | बाल साहित्य लेखन में अनुभव से ही परिपक्वता आती है | बड़ों के साहित्य लेखन के मुक़ाबले बाल साहित्य लेखन थोड़ा कठिन है| क्योंकि दुनियादारी के तमाम अनुभव और विद्वता का चोला ओढ़े हुए बड़ी आयु के लोगों को किसी बच्चे की मानसिकता को समझना कठिन हो जाता है | बच्चों की भावनाओं को तो मन से बच्चा बनकर ही समझा जा सकता है | यह इतना आसान भी नहीं है | 


Q अरविंद जी ! आप तो जानते ही है कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस डिजिटल दौर में पाठकों का किताबों से जुड़ाव दिनोदिन कम होता जा रहा है। कई साहित्यिक पत्रिकाएँ बंद हो रही है। आने वाला समय साहित्य के लिए नई चुनौतियाँ ले कर आने वाला है। आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए लेखकों को क्या करना चाहिए? अपने विचार व्यक्त कीजिये।

A4 – आनेवाला समय हमेशा चुनौतीपूर्ण ही होता है | जिससे सामंजस्य बैठाने के लिये आपको संभावित  बदलावों को स्वीकार करने के लिये तैयार रहना पड़ेगा | डिजिटल दौर बुरा नहीं बल्कि आपकी पहुँच को वैश्विक बनाने वाला है | छपी हुई पुस्तके व पत्रिकाएँ भले ही कम हो रही हैं लेकिन इनके पूरी तरह खत्म होने संभावना कम ही है | और हाँ, बंद होने वाली मुद्रित पत्रिकाओं की जगह भरने का काम भी नई डिजिटल पत्रिकाएँ और वेबसाइट लगातार कर रहे हैं | इसलिए चिन्ता की बात नहीं | लेखक तो बस अपनी या पाठक की रुचि का ईमानदारी से लिखते रहें | पढ़ने वाले मिल ही जाएंगे, हाँ प्लेटफॉर्म बदल सकते हैं, बस | 


Q आपने जब 3- 4 दशक पहले लेखन की शुरुआत की तो उस समय साहित्य जगत के क्या हालात थे ? वो वक़्त आज की भाग दौड़ भरी दुनिया से कितना अलग था? 

A5- वो मुद्रित पत्र - पत्रिकाओं और पुस्तकों का स्वर्णिम काल था | प्रकाशित लेखन को पर्याप्त प्रसिद्धि और पैसा भी मिल जाता था | लेकिन सभी प्रकार के नए लेखकों को अच्छा प्रकाशन /मंच मिलना तब भी आसान न था | जबकि आज तो आप तकनीक का फायदा उठाकर बिना अधिक लागत के भी अपनी रचना पाठकों तक आसानी से पहुँचा सकते हैं |

Q  आपका खुदका एक प्रकाशन संस्थान भी है। किस तरह की रचनाएं प्रकाशित करते है आप? अब तक कितनी किताबे प्रकाशित करने वाले हैं।

A6- वास्तव में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से अपनी पुस्तक ‘नीम भवानी” को मिलने वाली अनुदान  राशि लेने के लिये न्यूनतम समयावधि में उसे छापकर प्रस्तुत करना था, सो जल्दबाजी में एंजेल बुक्स की शुरूआत हो गयी | किन्तु अभी तक यह अव्यावसायिक ही है | जिन लेखकों को किसी कारण शीघ्र अच्छा प्रकाशक नहीं मिल पाता, मैं उनकी सहायता कर देता हूँ | भविष्य की योजना अभी नहीं बनी है, तब तक ऐसे ही “ऑन डिमांड” प्रकाशन चलता रहेगा |


Q आगे किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे है?  किन विधाओं में लिख रहे है? पाठकों को पढ़ने के लिए क्या नया मिलने वाला है?

A7- मन में बहुत कुछ चलता रहता है | फिलहाल उत्कृष्ट बाल कहानियों के दस खंडों का संकलन तैयार करने पर काम चल रहा है | इसमें बालसाहित्य के कई अनुभवी लेखक व संपादक एक टीम के रूप में मेरा सहयोग व मार्गदर्शन कर रहे हैं | एक वयस्क और कुछ बाल उपन्यासों पर भी लेखन अधूरा पड़ा हैं | फिलहाल फुटकर बाल कहानियाँ और कवितायें तो विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित हो ही रही हैं | पिछली रचनाओं के संग्रह प्रकाशन का भी काम होना है | 


Q लेखन के अलावा एक पाठक के रूप में आप किन लेखकों को पढ़ना पसंद करते है?

A8- अधिकतर प्रसिद्ध भारतीय व कुछ चर्चित विदेशी लेखकों को पहले ही पढ़ चुका हूँ | समय मिलने पर विशेषकर बाल साहित्य की किसी भी उपलब्ध / चर्चित रचना को पढ़ता हूँ | कभी- कभार समीक्षा भी लिख देता हूँ | 

Q लेखन -पाठन- प्रकाशन के अलावा खाली वक़्त में क्या करना पसंद करते हैं आप?

A9- लेखन के अलावा अपना बचत सलाहकार का व्यवसाय भी देखना पड़ता है, क्योंकि फिल्मी दुनिया या व्यावसायिक लेखन के अलावा आज के दौर में विशुद्ध लेखन की आमदनी से परिवार चलाना आसान नहीं है | फुर्सत में संगीत सुनना और पर्यटन करना पसंद है, इससे देश – दुनिया को समझने व यात्रा संस्मरण भी लिखने में मदद मिलती है | 

Q अंत मे युवा लेखकों को क्या संदेश देना चाहेंगे आप?

A10- बस अपने मन की लिखिए, स्वांतः सुखाय लेखन नहीं करते तो बाजार की माँग के अनुसार व्यावसायिक लेखन से लाभ उठाइये | छपने की जल्दबाज़ी न करके अपने लेखन को माँजने का प्रयास करिये | अवसर देर सेभी मिले तो निराशा को हावी मत होने दीजिये | लेखन में संख्या के बजाय गुणवत्ता को ही महत्व दें | भविष्य के प्रति हमेशा आशावान रहें | लेखक का महत्व हमेशा बना रहेगा .


साक्षात्कार देने के लिए धन्यवाद अरविन्द जी. आशाकर्ता हूँ आपकी लेखनी यूँ  ही चलती रहेगी और आप नित - नये कीर्तिमान बनाते रहेंगे ..


साहित्यकार परिचय - अरविन्द कुमार ‘साहू’

जन्मतिथि: 15-10-1969 (पन्द्रह अक्टूबर उन्नीस सौ उनहत्तर ई.)   
 जन्म स्थान: रायबरेली, उत्तर प्रदेश, भारत
प्रकाशित साहित्य : नीम भवानी (प्रबन्ध काव्य), विश्रान्ति (उपन्यास), कवि बौड़म डकैतों के चंगुल में (हास्य उपन्यास), परियों का पेड़ (बाल उपन्यास) किस्सा ढपोरशंख का, लौट आओ गौरैया (बाल कहानी संग्रह),                                             *ईबुक कवि बौड़म और समझदार गधा (हास्य उपन्यास) कवि बौड़म के कारनामे (संयुक्त उपन्यास), खुद क्यों नहीं नहाते बादल (बाल कविता संग्रह), डॉक्टर प्रेत (भुतही कहानियों का संग्रह) लेजर मैन का आतंक (मनोरंजक कहानी संग्रह), अजब अनोखी पद्य कथाएँ (कविताओं में कहानियाँ), कुछ बूझें कुछ ज्ञान बढ़ाएँ (बच्चों के लिए पहेलियाँ) |                                                     *शीघ्र प्रकाश्य (पांडुलिपियाँ)- जंगल में फटफटिया, सॉरी छुटकी,  स्मार्ट फोन (बाल कहानी संग्रह) कवि बौड़म की हास्य कथाएँ (संग्रह) पत्थर पर उगी दूब (कविता गीत संग्रह ) गजल एकादश (गजल संग्रह )THE TREE OF ANGELES (child fiction, परियों का पेड़ का अँग्रेजी अनुवाद)                                                                                                                                                                     पूर्व में प्राप्त पुरस्कारों/सम्मानों का विवरण : *साहित्यश्री, *भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) का प्रेमचंद जयन्ती सम्मान, *श्री जगदीश दुग्गड़ स्मृति राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मान एवं पुरस्कार 2016 *नेपाल-भारत मैत्री फाउंडेशन विशिष्ट प्रतिभा सम्मान 2017, *पं. रामानुज त्रिपाठी बाल साहित्य सम्मान 2018, *आर्य लेखक परिषद दिल्ली द्वारा साहित्य प्रज्ञा सम्मान *बाल साहित्य संस्थान कानपुर द्वारा प्रदत्त किशोर सम्मान व पुरस्कार 2019,*हम सब साथ साथ संस्था द्वारा विशिष्ट प्रतिभा सम्मान 2019 |                                                            अन्य साहित्यिक उपलब्धियाँ : पिछले 33 वर्षों से उपन्यास, कहानी, कविता, गजल, लेख आदि विभिन्न विधाओं में लेखन | बाल साहित्य में विशेष रुचि | नंदन, चंपक, बालभारती, पराग, नन्हें सम्राट, बालहंस, बालवाणी, बाल किलकारी, अपूर्व उड़ान, बाल वाटिका, बाल भास्कर, बच्चों का देश, बालभूमि, अच्छे भैया, दोस्त, कादंबिनी, नवनीत, आजकल, सूरज समाचार विचार, निर्भय पथिक, जनसत्ता, दैनिक जागरण, ट्रिब्यून, बालरंग आदि देश - विदेश की प्रमुख पत्र - पत्रिकाओं में 500 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित |                                                               *अनेक कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ एवं विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों व बाल साहित्य की रचनात्मक कार्यशालाओं, प्रशिक्षण सत्रों में भागीदारी, प्रतियोगिताओं के निर्णायक मण्डल सदस्य  | राष्ट्रीय सहारा (दैनिक समाचार पत्र) में संवाददाता रहे |*अखिल भारतीय विचार लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान|       

*सम्पादन अनुभव – अपूर्व उड़ान (बाल मासिक), जागरण जंक्शन में कार्यकारी संपादक रहे | मधुर सरस मासिक, सारा समय न्यूज एवं सुपर इंडिया साप्ताहिक में साहित्य संपादक तथा सूरज पॉकेट बुक्स एवं जयविजय (ई पत्रिका) मे सह संपादक रहे |                                                                                      सम्पर्क सूत्र (दूरभाष सहित) : साहू सदन, अकोढ़िया रोड, ऊँचाहार - रायबरेली (उप्र) पिन– 229404 मोबाइल : 7007190413 / 9838833434 ईमेल: aksahu2008@rediffmail.com     



 Galpgyan.com पर उपलब्ध अरविन्द जी की कहानियांाँा







अमेज़न .कॉम पर उपलब्ध अरविन्द कुमार साहू जी की पुस्तकें



किस्सा ढपोरशंख का : (बाल कहानी संग्रह) 

नीम भवानी : नीम वृक्ष पर आधारित प्रबन्ध काव्य

ठेलुहे   की शादी 


अजब अनोखी पद्य कथाएँ


डॉक्टर प्रेत: भुतही कहानियाँ 

कवि बौड़म डकैतों के चंगुल में: हास्य उपन्यास


खुद क्यों नहीं नहाते बादल : 38 बाल कवितायें (Hindi Edition)


लौट आओ गौरेया 



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2 टिप्पणियाँ

  1. मैंने इनकी दो हास्य किताबें पढ़ी है। बढिया लिखते हैं।

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  2. रोचक साक्षात्कार रहा। बाल साहित्य लिखना वाकई काफी टेढ़ी खीर है। अरविन्द जी का लेखन प्रेरित करता है।

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