गल्पज्ञान- साक्षात्कार:विकास भांती

 

विकास भांती जी की पिछली किताब ,'डिटेक्टिव विक्रम' को पाठकों ने काफी सराहा था, और इनकी नई किताब 'किन्चुल्का'  जो की एक पौराणिक -विज्ञान- गल्प हैं इनदिनों काफी सुर्ख़ियों में हैं .

 तो मित्रों! आज हम रूबरू होने जा रहें है विकास भांती जी से और जानेंगे उनकी सहित्यिक यात्रा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।

 विकास जी सबसे पहले  बधाई देना चाहूँगा आपको नई किताब किंचुलका के लिए। जो आते ही सुर्खियों में छाई हुई है। और फिर साक्षात्कार की  शुरुआत करते है लेखक परिचय से।

साक्षात्कार:विकास भांती vikash bhanti kinchulka interview
image source: facebook/vikas bhanti


Q विकास जी अपने बारे मे कुछ बताइये। कहाँ से हो? बचपन कहाँ बीता? वर्तमान में  आप क्या कर रहें हो ?

A. मूलतः मैं कानपुर उत्तर प्रदेश का निवासी हूं। पढ़ाई लिखाई ने कानपुर, कोटा, झांसी घुमाया तो नौकरी ने दिल्ली, अलीगढ़, इंदौर, गोरखपुर, आगरा और बरेली। वर्तमान में एक प्रतिष्ठित सीमेंट कंपनी के तकनीकी विभाग में यूपी का कार्यभार संभाल रहा हूं और काम से ही समय निकाल कर लिखने की रुचि को जीवित रखा है।

Q साहित्य का पहला अंकुर आपके अंतर्मन मैं कैसे फूटा? पहली रचना(कविता या कहानी) कोनसी थी? इसके पीछे भी अगर कोई कहानी हो तो सांझा कीजिये।

A. लिखाई शायद खून में ही थी, बोलना सीखने के साथ ही मोहल्ले पड़ोस की ऑन्टीयों, दीदियों, रिश्तेदारों और परिवार वालों को लंबी लंबी 3-4 दिन तक चलती कहानियां सुनाया करता था। आज वो लोग बोलते हैं हमें तो उस वक़्त ही लगता था कि तुम लेखक बनोगे। एक किस्सा भी है कि स्कूल में प्रार्थना के बाद मुझ पर एक कहानी सुनाने की ज़िम्मेदारी थी। उस वक़्त मैं पहली कक्षा में था। हर रोज़ कोई न कोई कहानी पढ़ कर जाता था पर एक दिन भूल गया। अब मज़बूरी थी कहानी बनाने की, तो कुछ यूं बनाई- एक हथनी और बकरी दोस्त थे। उनके बच्चे भी साथ ही खेलते थे, एक दिन दोनों माएं बाजार गयीं तो बच्चे साथ खेलने लगे। खेल खेल में बच्चे हाथी मेमनों पर चढ़ कर उन्हें बुरी तरह घायल कर बैठे, तो इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि दोस्ती बराबरी में ही होनी चाहिए 😂😂😂।

Q गद्य के अलावा आप कविताएं भी लिखते हो, और काफी बेहतरीन लिखते हो। जिनमे एक ख़ास किस्म की गहराई और सामाजिक संदेश छुपे होते है,( 'लो जी अखबार में खबर सी आई है' 'क्यों और किसके लिए' 'मंत्री जी' आदि और भी उदाहरण है।) जो आपके कविहृदय की समाज के प्रति संवेदनशीलता को भी बखूबी  से दर्शाते है। इस तरह की कविताएं लिखने की प्रेरणा कहाँ से लाते हो आप?

A. काफी रिसर्च की है आपने, इंटरव्यू से पहले...वैसे हां! एक सही शुरुवात तो पद्य से ही हुई और कविता बहुत सशक्त माध्यम लगता है मुझे विसंगतियों को दिखाने का। पद्य जितनी गहरी चोट करते हैं मुद्दों पर उतना कोई गद्य कभी नहीं कर सकते। राम प्रसाद बिस्मिल ने सरफरोशी की तमन्ना कह कर जिस क्रांति को खड़ा किया वो कोई भी गद्य न कर सका था। 

Q पहला उपन्यास डिटेक्टिव विक्रम के बारे में कुछ बताइये। इसके कथानक का विचार कैसे आया? और जब पहली किताब पेपरबैक में प्रकाशित हुई तो आपके होंशले में कितना इजाफा हुआ?

A. इस कहानी की शुरुआत 2018 में हुई थी। एक ऑनलाइन राइटिंग पोर्टल पर मैंने एक हॉरर थ्रिलर खत्म किया था और एक सवाल किया पाठकों से कि अगला क्या लिखूं। 

एक सज्जन विक्रम गोस्वामी, जो नोएडा रहते हैं उन्होंने मुझसे जासूसी लिखने की इच्छा व्यक्त की। पलट के मैंने भी लिख दिया, जी डिटेक्टिव विक्रम। बस यूं ही एक संयोग एक कहानी बन गया और एक दिन अचानक एक कॉल आया कि इस कहानी को क्या मैं एक किताब के तौर पर छपवाना चाहूंगा। अब अंधा क्या चाहे दो आंखें तो इस तरह ये छपी और जब हाथ में आई तो वही फील था जो पहली जॉब पाते समय थी। 

जहां तक कथानक की बात है तो एक कंपनी के सामान्य अकाउंटेंट से देश के अग्रणी जासूस बनने की कहानी है डिटेक्टिव विक्रम।

Q  नई किताब किंचुलका के बारे में कुछ बताइये।  जो रिलीज़ होते ही अमेज़ॉन की हॉटलिस्ट में छाई हुई है। सुना है, पौराणिक और विज्ञान गल्प का सम्मिश्रण है । और शाम के वक़्त ये नाम क्यों नही लिया जा सकता?

A. पौराणिक काल में देवता जब राक्षसों से पराजित होने लगे तो उन्होंने एक अजेय देव उद्धृत किया जिसे नाम मिला किंचुलका। अब चूंकि वो सबसे पराक्रमी था तो एक दिन देवताओं से ही भिड़ बैठा। उसे हराया तो नहीं जा सकता था पर सुलाया ज़रूर जा सकता था। पर एक शर्त के साथ कि अगर सूर्यास्त के बाद उसका नाम लिया गया तो वो जाग जाएगा। 

इस कहानी में पुराणों से आया किंचुलका है तो आज जीनोम टेक्नोलॉजी से बना डीएसडी भी है। अब डीएसडी कौन है ये तो अगले हफ्ते सबको पता चल ही जायेगा। 

Q किंचुलका  'नाम' का विचार कैसे आया? कहानी से जुड़े पौराणिक तथ्यों की रिसर्च में कितना समय लगा? और कितना समय लगा इसे एक 'विचार' से एक पुस्तक बनाने  में?

A. काफी जोनर ट्राय कर चुका था पर सुपरहीरोज टेल्स नहीं सोचीं थीं तो शुरुवात करी यही सोच कर कि एक सुपरहीरो टेल लिखूंगा पर इंडियन टच के साथ पर कहानी आगे बढ़ने के साथ समझ आया कि ये कुछ नया पक रहा है। मेरा मानना है लेखक कहानी नहीं लिखता बल्कि कहानी अपना लेखक चुनती है। सलीम जावेद दूसरी शोले कभी पैदा नहीं कर सके। रही बात रिसर्च की तो बिना रिसर्च कुछ भी लिखना गलत भी है, दुष्कर भी है और खतरनाक भी। तो वो लिखने के साथ ही ज़रूरत के हिसाब से होती गयी। किंचुलका नाम भी निकला है संस्कृत शब्द किंचुलक से, जिसका अर्थ है केंचुआ। अब इसका संबंध तो पुस्तक पढ़ कर ही स्थापित किया जाए तो बेहतर होगा।

Q आने वाली किताब नागलैंड के बारे में कुछ बताइये। किताब पाठकों तक कब पहुचेगी?

A. नागलैंड एक कॉमिक थ्रिलर है, संवाद बहुत अक्खड़ हैं इस किताब के और पूरी उम्मीद है कि पाठकों को मेरे मुख्य किरदार के मन के भावों को समझते हुए दर्द भी होगा और हंसी भी आएगी। कहानी है नाग मणि की खोज पर।

Q कहते है कि लेखक की संपत्ति उसकी किताबों से मिलने वाली रॉयल्टी नही, बल्कि उसके अर्जित पाठकों से मिलने वाली सराहना और प्रेम होती है।

प्रतिलिपि पर भी आपका एक बड़ा फैन बेस है। लाखों लोगों ने आपकी रचनाओं को पढ़ा और सराहा है। प्रतिलिपि ने कितना योगदान दिया आपकी लेखनी में धार लगाने मैं?

A. पिछले एक प्रश्न में जिस ऑनलाइन पोर्टल का ज़िक्र मैंने किया वो प्रतिलिपि ही है। इस पोर्टल ने बहुत कुछ दिया, बहुत से लेखकों को। पाठकों का प्यार, उनकी नाराज़गी, उनकी तत्परता, उनका कहानियों के प्रति प्रेम सब बहुत शानदार लगता है। गलत चीज़ पर प्रतिक्रिया भी तुरंत मिल जाती है। तो आज शायद मैं उपन्यास लिख सका उसके पीछे प्रतिलिपि का बहुत बड़ा योगदान है।

Q कहीं पढ़ा था कि आपको सामाजिक कहानिया लिखने में बड़ी रुचि है। क्या आगे इस तरह का कोई उपन्यास लिखने का विचार है? आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में भी जानकारीसांझा कीजिए।

A. मेरा एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, मार्केटिंग पर्सनल की ज़िंदगी पर एक उपन्यास जो उनके जीवन के उतार, चढ़ाव, प्रेम विसंगतियों को पाठकों तक पहुंचाए। शायद अगर मेरी बात पाठकों तक पहुंची तो दर दर भटकने वाले इन मार्केटिंग ऑफिसर्स को दरवाज़े से ही दुत्कारे जाने की रिवाज़ पर कुछ रोक लगे। 

आगामी प्रोजेक्ट्स में नागलैंड के बाद एक हॉरर कहानी है, फिर एक हिस्टोरिक फिक्शन लिखने का सोचा है, विक्रम की अगली कुछ कहानियां और बाकी पाठकों की मर्ज़ी से भी कुछ। 

Q आपके पसंदीदा लेखक कोंन है, जिन्हें आप खाली समय में पढ़ते हो, या जिनकी रचनाओं ने आपको लिखने को प्रेरित किया हो।

A. ये कठिन सवाल है मेरे लिए, कहने को मैं किसी भी बड़े लेखक का नाम कहकर खुद को बुद्धिजीवी बता सकता हूं पर सत्य यह है कि मैं कुछ नहीं पढ़ता। स्कूल के बाद मैंने इक्का दुक्का छोड़ साहित्य में कुछ खास नहीं पढ़ा। पर शायद यही मेरी यूएसपी भी है जो मुझे ओरिजिनल रहने में मदद करती है। बहुत बार सलाह मिलती थी कि बड़े लेखकों को पढ़ा करूँ पर मुझे व्यक्तिगत तौर पर लिखते हुए पढ़ने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई। शायद इसलिए कि मैं पैदायशी कहानीकार था 😃😃😃

Q उपन्यास लेखन एक लंबी प्रकिया है। कहानीकार को कभी-कभी महीनों से लेकर सालों लग जाते है एक उपन्यास के लेखन में। ऐसी क्या चीज़ या प्रेरणा है, जो आपको लिखने के लिए प्रेरित करती रहती है?

A. लिखने के साथ प्रेरणा बहुत आवश्यक है। मेरी प्रेरणा मेरी धर्मपत्नी शिल्पी हैं। मैं कुछ भी लिखता हूं उनको सुनाता हूं और उनकी उत्कंठा मुझे जल्द से जल्द लिखने पर विवश करती रहती है। एक 20 हज़ार शब्दों का लघु उपन्यास तो मैंने 9 दिन में लिख डाला था। किडनैप नाम से किंडल पर है और रिलीज़ के बाद से ही अपनी केटेगरी में टॉप 100 में है।

Q लेखन के अलावा किन चीजों का शौक़ रखते है आप?

A. लेखन के अलावा गायन का शौक है, स्कूल कॉलेज में एक्टिंग का बहुत कीड़ा था। कॉलेज में तो बेस्ट एक्टर का ईनाम बहुतों बार जीता, वाद विवाद प्रतियोगिताओं में प्रथम ही आया हमेशा, नई निर्माण तकनीकीयों के विषय में पढ़ना, जानना पसंद है। खाली समय में घर पर कुछ नया पकाने में बहुत आनंद आता है, राजनीतिक चर्चाएं पहले अच्छी लगती थीं पर अब उनमें एक उग्रता आ गयी है तो अब होती हुई चर्चाओं को रुचि से सुनता तो हूँ पर भाग नहीं लेता। कहानी कहने का भी शौक है पर अगर एक शौक जिसके लिए बाकी सब छोड़ दूं वो लेखन ही है।

Q राइटर्स ब्लॉक इनदिनों काफी आम हो गया है। कई लेखक (खासकर मैं खुद)  इससे उबरने में महीने तक लगा देते है। क्या आपको कभी ये समस्या हुई है? और इस मनोदशा से बाहर निकलने के लिए आप  क्या करते है?

A. बिल्कुल होता है ऐसा औऱ वाकई महीनों हो जाता है। सच कहूं तो अभी मैं उसी दौर में हूं। पिछले दो माह से कुछ नहीं लिखा है। पर उबरने का जो तरीका समझ आया वो यही कि झक मार कर एक दिन लिखने बैठ ही जाओ। जब तक मन लगना शुरू न हो ऐसी ज़बरदस्ती करते रहो। मुझे दो से तीन दिन लगते हैं ऐसी ज़बरदस्ती के बाद। 

Q लेखन के पीछे आपका कोई कोई कोई उद्देश्य जरूर होगा। क्या लगता है, आप अपने उद्देश्य में कितने सफल हुए? और मंजिल कितनी दूर है अभी?

A. ज्ञानपीठ पुरस्कार जीतना है मुझे..... ☺️☺️☺️☺️ हाँ कोई लक्ष्य तो होना ही चाहिए किसी भी काम का। मंज़िल क्या अभी रास्ता भी दिखना शुरू नहीं हुआ है। वैसे कहूँ तो शायद अभी मुझे मालूम भी नहीं कि कोलकाता कहाँ है बस मैं अपने घर के बाहर खड़ा टैक्सी का इंतज़ार कर रहा हूं, अपना बोरिया बिस्तरा हाथ में थामे। 

Q अंत में  आप नए लेखकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

A. अभी तो मैं खुद नया लेखक हूँ, किसी को कुछ सिखा सकूँ वो हैसियत नहीं आई है अभी फिर भी यही कहना चाहूंगा कि जो लिखें अपनी स्टाइल में लिखें, दूसरों से प्रेरणा लें पर प्रभावित न हों। और मुझे एक चीज़ और लगती है लेखक होने के नाते किसी एक निश्चित विचारधारा से बचकर ही रहें। क्योंकि विचारधारा का ठप्पा आपका कैरियर खत्म कर सकता है। सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।


विकास जी की किताब किंचलका आप अमेज़ॉन से आर्डर कर सकते हो।




अन्य साक्षात्कार -

साक्षात्कार:विकास भांती





 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ