खलील जिब्रान के अनमोल वचन

 खलील जिब्रान का जन्म 6 फरवरी को पश्चिमी  ऐशिया में  भूमध्य  सागर के  पूर्वी  तट पर स्तिथ एक देश  लेबनान  में हुआ था। 12 वर्ष की आयु में अपने परिवार के साथ बोस्टन चले गए थे।

Khalil jibran-galpgyan
Image source: Wikimedia Commons 


 खलील जिब्रान अरबी अंग्रेजी व फारसी के ज्ञाता थे। वह एक उच्चकोटि के लेखक होने के साथ दार्शनिक और चित्रकार भी थे। अपने चिंतन और विचारों के कारण वे समकालीन पादरियों और अधिकारी वर्ग के प्रकोप का शिकार हुए, और  जाति से बहिष्कृत करके देश निकाला दे दिया गया था। जिब्रान उपन्यास कहानी कविता नाटक व सूक्तियां लिखने के अतिरिक्त चित्रकारी भी करते थे।
 

इनकी कालजयी कृति -मसीहा के कारण इनकी गिनती विश्वके महान लेखकों में की जाती है।


  इनकी कहानियों में इनकी कहानियों में अध्यात्म, आत्मज्ञान और ईश्वर  को समझने को समझने की उतकुंठा उत्पन्न करने से संबंधित तत्व पॉय जाते है ।
लेखक होने के साथ-साथ यह एक उच्च कोटि के दार्शनिक भी हैं। अद्भुत कल्पना शक्ति स्वामी खलील जिब्रान, चिंतन में भारतीय लेखक रविंद्र नाथ टैगोर के समकक्ष ही माने जाते हैं। जिब्रान की कहानियां 22 से अधिक भाषाओं में देश-विदेश तथा हिंदी गुजराती मराठी उर्दू तमिल बंगाली आदि में अनुवादित हो चुकी हैं। उर्दू और मराठी के सबसे अनुवाद हुए हैं ।साथ ही इनके चित्रों की प्रदर्शनी भी कई देशों में लगाई जा चुकी है। 48 वर्ष की आयु में एक कार दुर्घटना में 10 अप्रैल 1931 को न्यूयॉर्क में इनका देहांत हो गया इनके स्वर्गवास के बाद हजारों लोग इनके अंतिम दर्शन को आते रहे, अंत में इन्हें इनकी जन्मभूमि लेबनान के गिरजाघर में इन्हें दफनाया गया.

 इनकी कुछ श्रेष्ठतम सूक्तियां निम्न है

" सत्य को जानना चाहिए पर उस पर कहना कभी --कभी  ही चाहिए."

" यदि तुम अपने अंदर कुछ लिखने की प्रेरणा का अनुभव करो तो तुम्हारे अंदर ये  बातें होनी चाहिए

१- ज्ञान और कला का जादू.

 २-शब्दों के संगीत का ज्ञान

 3 श्रोताओं का मोह लेने का जादू."






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रूमी के अनमोल वचन  पढने के लिए इस लिंक पर जाएँ - रूमी के अनमोल बचन 

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