घोस्ट राइटिंग क्या है ? what is ghost writing ?



घोस्ट राइटर क्या होता है ?


आप लोगों में से अधिकांशतः पाठक भली-भांति जानते होंगे कि एक राइटर अथवा एक लेखक क्या होता है।

और आपमें से कई लोग अभीतक ये समझ रहे होंगे,कि घोस्ट राइटर; यानि भूतिया कहानी लिखने वाला लेखक ghost writer होता है।

जो कि सही नही है !

घोस्ट राइटर दो शब्दों से मिलकर बना होता है . घोस्ट + राइटर ।

यहाँ पर घोस्ट का अर्थ भूत नही .. वरन वह व्यक्ति है, जिसका कोई वजूद नही. जो अद्रश्य हो .. असल भूत न होकर भी एक भूत जैसा अदृश्य लेखक, घोस्ट राइटर कहलाता है।


ghostwriting



आसान शब्दों में घोस्ट राइटर का अर्थ होता है, एक एसा लेखक जो दूसरों के लिए लिख रहा है.  उसकी लिखी कहानी /किताब / पटकथा या किसी भी तरह की लिखित बोद्धिक संपदा, जो उसने पैसों के लिए किसी और के लिए लिखी है, और वहां उसी की पुस्तक पर लेखक के रूप में  उसका नाम न आकर उस व्यक्ति का नाम आएगा जिसके लिए उसने वो किताब लिखी है,.

लेखन की दुनिया मे ये चीज़ घोस्ट राइटिंग कहलाती है ।


अधिक आसान शब्दों में समझे तो घोस्ट राइटर एक एसा लेखक है, जो अपनी प्रतिभा का उपयोग किसी और के लिए कर रहा है, और इसके बदले वो अपने पारिश्रमिक के रूप में एक सुनिश्चित धनराशि लेता है।


घोस्ट लेखक किसके लिए काम करते है ?


आप लोग जानते ही होंगे कि, आजकल के इस चमक -धमक वाले दौर में जहाँ पाठक निरंतर कम होते जा रहे है,वहीं दूसरी तरफ लेखकों की गिनती दिनों- दिन बढती ही जा रही है, क्यूंकि अब हर किसी का- चिन्तक ,विचारक ,बुद्धिजीवी या फिर इंटेलेक्चुअल दिखने की चूहां दौड़ में शामिल होना पहले की तुलना में काफी आसान होता जा रहा है.

किन्तु फिर भी लेखक बनना कोई हलवा तो है नही लेकिन एक टेडी खीर जरुर है , लेखक बनने के लिए मात्र शैक्षणिक योग्यता की जरुरत ही काफी नही है, वरन भाषा पर अच्छी पकड़, मानव मनोविज्ञान की आधारभूत समझ, और एक अच्छी भाषाशैली का होना भी अति आवस्यक है.

और इन् गुणों को विकसित करने में साधारण आदमी को सालों से दशकों तक का समय लग जाता हैं।

इसीलिए कुछ लोग, खाशकर- सेलिब्रिटी, राजनेता, खिलाडी या फिर चाहे वो किसी भी क्षेत्र का कलाकार ही क्यों न हो..सब अपनी- अपनी किताबें प्रकाशित कर रहें है , क्यंकि ये चीज़ आजकल एक ट्रेंड बन चुकी है ..


कुछ लोग जो थोडा- बहुत लेखन की बारीकियां समझ सकते है, वो किसी तरह से अपनी किताब लिख कर उसे प्रकाशित कर लेते हैं, लेकिन कुछ लोग समय की कमी, या लेखन की बारीकियों से अनभिज्ञ  होते है , वो अन्य लेखकों को अपनी किताब लिखने के लिए कहते है  और इसके बदले में उन्हें उनका पारिश्रमिक देते हैं।


ऐसा भी नही है कि किसी ने लेखक को एक किताब लिखने को बोल दिया, तो अब लेखन संबंधी सब काम घोस्ट लेखकों को ही करना होगा।


क्लाइंट द्वारा घोस्ट लेखक को किताब के विषय का  एक खांचा या फिर एक रूप- रेखा दी जाती है . जिसके हिसाब से उन्हें काम करना पड़ता है . यानि कि किसी के विचारों को एक किताबी शक्ल देना घोस्ट राइटिंग है।

उदाहरण के लिए आप किसी से घोस्ट राइटिंग करवाना चाहते है, तो आपको उस लेखक को थोडा- बहुत उस किताब के विषय, थीम और कहानी के सम्बन्ध में बताना होगा , आप उस किताब के द्वारा क्या सन्देश देना चाहते है ये भी बताना होगा .. अगर कोई घोस्ट राइटर को किताब में खुद के विचार प्रस्तुत करने को कहता है, और बाद में उसे किसी प्रकार का श्रेय नही देता है तो ये चीज़ घोस्ट राइटिंग नही अपितु उस लेखक के बोद्धिक संपदा की चोरी है .


 इसलिए ध्यान रखें - यदि आपके पास कोई घोस्ट राइटिंग का कोई प्रोजेक्ट आता है, तो सबसे पहले अपने क्लाइंट से किताब की विषयवस्तु या कहानी के सम्बन्ध में अच्छी तरह से बात कर लें , और यह भी जांच ले कि कहीं वो आपके विचारों को खुद के नाम से प्रकाशित तो नही करना चाहता है ?

क्यूंकि ऐसा हमेशा से होता आया है .. फिल्मो में पटकथा लिखने वाले अनेकों लेखकों ने अपने साक्षात्कार में स्वीकार किया है कि उन्होंने करियर के शुरुवाती दौर ने घोस्ट राइटिंग तो की ही है , लेकिन उस दौरान उनके मोलिक विचारों / बोद्धिक संपदा का भी हनन हुआ है .


घोस्ट राइटर कैसे बने ?


 घोस्ट राइटर बनने लिए आपके पास निम्नलिखित  योग्यता होनी बहुत जरुरी है .


१ - भाषा पर अधिकार -


अगर आप हिंदी या इंग्लिश किसी भी भाषा में लिख रहे है तो आपके पास , व्याकरण का ज्ञान , अच्छी भाषा शैली के साथ साथ साहित्य का जरुरी ज्ञान भी होना चाहिए .. क्यूंकि  आप जिस किसी के लिए भी कार्य करोगे वो आपकी योग्यता का परिक्षण जरुर करेगा।


२ - अपनी विधा में महारत -


घोस्ट राइटिंग कई प्रकार की होती है , मसलन -  गल्प लेखन ,  कथेतर लेखन , पटकथा लेखन आदि।

इन विधाओ में ही आप पाएंगे कि यहाँ भी कई प्रकार के लेखन शामिल है - जैसेकि अगर आप एक गल्प लेखकअथवा फिक्शन लेखक हो, तो आपको गल्प की किसी एक शाखा पर महारत होनी चाहिए ।

उदाहरण के लिए अगर आप हॉरर लिखते हो तो  जरुरी नही कि आप लहर तरह कि विधाओ में महारथ प्राप्त कर चुके हो।अगर आप सिर्फ हॉरर लेखन में अच्छे हो तो इतना ही काफी है।क्यूंकि भले ही आप एक छोटी सी विधा में माहिर हो, फिर भी आपके पास उस लेखक के मुकाबले घोस्ट राइटिंग के जादा मौके आयेंगे, जो हर प्रकार की चीजें लिखता है।


३ अनुभव -


दोस्तों चाहें आप किसी भी क्षेत्र में करियर बनाना चाहो , हर जगह एक ही चीज़ को प्राथमिकता दी जाती है , वो चीज़ है अनुभव।
घोस्ट लेखन के लिए आपके पास लेखन का अच्छा खाशा अनुभव भी होना चाहिए, क्यूंकि कोई भी व्यक्ति ये नही चाहेगा कि वो पैसे देकर एक ऐसे व्यक्ति से अपनी किताब लिखवाएँ जो नोसिखिया हो।

घोस्ट लेखन से कितना पैसा कमाया जा सकता है?
ये बात भी आपके अनुभव पर निर्भर करती है।
यदि आप एक शुरुआती लेवल के लेखक हो तो आपको शुरुआत में कुछ हजार रुपये ही दिए जाएंगे।
मध्यम लेवल के लेखक हज़ारों से लाखों रुपये प्रति किताब तक लेते है।
और एक 'प्रो लेखक' यानि कि एक माहिर लेखक जो राजनेताओं , खिलाड़ियों या फिर सेलेब्रिटी आदि लोगों के लिए लिखता है उसका मानदेय लाखों से करोड़ो के बीच होता है।

  घोस्ट लेखन कब तक करे ?- 


 लेखन को अगर आप एक करियर की दृष्टी से देखते हैं तो शुरुआत में आपको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

आप चाहें कितनी भी अच्छी किताब लिख ले, बिना मार्केटिंग के आपको इतनी अच्छी कमाई नही हो सकती कि आप अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें।

ऐसे में घोस्ट लेखन  करना कमाई का एक अच्छा विकल्प है। कितु ध्यान रखें कि आप चाहें घोस्ट लेखन से कितने भी पैसे कमा ले, लेकिन आपको एक लेखक तभी माना जायेगा जब आप दूसरों के लिए नही बल्कि खुद के लिए लिख रहे हों।

अगर आपके मन में धन  के साथ  -साथ  यश व प्रसिद्धि पाने की ललक हो तो, घोस्ट लेखन  के साथ- साथ अपने व् अपने नाम के लिए भी कुछ न कुछ लिखते रहें। और जब आपको लगे कि आपने अब वो मुकाम हाशिल कर लिया है कि अब आप अपने नाम व अपने काम से अपनी जीविका चला सकते है तो फिर घोस्ट लेखन छोड़ दें .. घोस्ट लेखन आपको कब तक करना है ये आपके विचार पर निर्भर करता है।


घोस्ट लेखन सही या गलत ?

घोस्ट लेखन कोई नई चीज़ नही है , फिल्म इंडस्ट्री में ये चीज़ फिल्मो की सुरुवात के समय ही आ गयी थी .. बड़े -बड़े फिल्म निर्माताओं के पास लेखकों की एक टीम होती थी जो उनके लिए कहानिया लिखती थी.. बदले में उन्हें उनका मानदेय दिया जाता था।

साहित्य लेखन में भी शुरुवात से एसा ही हाल था . यही कारण था कि नामचीन लेखक एक महीने के भीतर ही एक साथ कई पुस्तके प्रकाशित कर लेते थे ।


साधारण दृष्टी से देखा जाय तो बहुत से लोग ये निर्णय लेते है कि पैसों के लिए अपनी प्रतिभा को बेचना, अपनी आत्मा को बेचने जैसा है।

किन्तु ये बात भी सच है कि अगर घोस्ट राइटिंग जैसा कांसेप्ट नही होता तो आज; कई बड़े लेखक, लेखन छोड़कर कोई दूसरी नौकरी कर रहे होते,क्यूंकि लेखन द्वरा अपनी जरुरत पूरी करने ने काफी श्रम और समय लागत है। और लेखन की दुनिया में टिके रहने के लिए धन की जरुरत होती है।

अतः ये बात पूरी तरह से आपके चित्त पर निर्भर करी है कि आप इस कांसेप्ट को किस दृष्टी से देखते हो।


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6 टिप्पणियाँ

  1. उत्तम जानकारी। वैसे यह प्रथा बहुत पुरानी है।

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  2. जी हां सर.पटकथा लेखन में ये ब्लैक & व्हाइट फिल्मों के समय से है और कथा साहित्य में ये लुगदी साहित्य के दौर से भी पुरानी है।

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