साक्षात्कार : साबिर खान पठान

साबिर खान जी वैसे तो गुजराती साहित्य मे एक जाना -पहचाना नाम है । e book  माध्यम हो या फिर paperback , इनकी किताबें पाठकों द्वारा हाथों -हाथ ली जाती है ॥ साबिर जी वैसे तो कई शैलियों मे लेखन कर चूकें है लेकिन, हॉरर लेखन की दुनिया मे आपका अलग ही मुकाम है , यही कारण है की आपके   प्रसंशक  आपको ' हॉरर ' का  बेताज बादशाह बुलाते है ॥

गुजराती भाषा मे साबिर जी की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है , और हिन्दी भाषा मे भी साबिर भाई ने विभिन्न पोर्टल्स पर कहानिया लिखी है , लेकिन   हाल ही मे 'flydreams publications ने  इनकी पहली हिन्दी paperback  किताब  'काल -कलंक ' प्रकाशित की है ,जिसे पाठकों ने भी काफी सराहा है । 

आज हम गुफ्तगू करेंगे साबिर जी से  और जानेंगे उनके जीवन से जुड़े कुछ अनछुवे पहलुओं को ।




प्रश्न -  साबिर भाई! आपकी किताब काल -कलंक के लिए बधाइयाँ !

  वैसे तो आप परिचय के मोहताज नही है लेकिन फिर भी  पाठको को अपने बारे में कुछ बताइये। क्या करते हैं आप? कहाँ से हो?


उत्तर - पहली बात तो आपका खूब खूब धन्यवाद की आपने मुझे  पाठकों से  दो चार बातें करने का अवसर दिया।

वैसे मेरा वतन राजस्थान के जोधपुर जिले का बिलाडा गाँव है। अंबाजी आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है फिलहाल सूरत में स्थित हूँ। 


प्रश्न -  लेखन का चस्का कैसे लगा और आपकी पहली रचना कोनसी थी? इसे लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली?


उत्तर - लिखने का शौक मुझे स्कूल के दिनों से लगा। पाठ्यक्रम में आने वाली कहानियों में काफी रूचि थी। 

किसी भी कहानी में पहले लेखक का परिचय रहता था वह मैं बड़ी दिलचस्पी से पढ़ लेता। उनकी अनगिनत रचनाओं के नाम देखकर आँखों में अनोखी चमक आ जाती थी। फिर मेरा मन भी कुछ न कुछ लिखने को करता था। 12वीं कक्षा में प्रार्थना में बच्चों को गाने के लिए भजन लिखने से शुरुआत की थी। 

हॉरर में दिलचस्पी बहुत ज्यादा थी क्योंकि राजस्थान का इलाका हॉरर किस्सो के लिए मशहूर है और शरीर में दहशत की लहर दौड़ाने वाले किस्सो सें रूबरू होना आम बात थी। 

बहुत सारे किस्सो से मैं पापा जी के कारण रूबरू हुआ। उन्हीं किस्सों को कागज में उतारने का जुनून चढ़ा। वही छोटे-छोटे किस्सो से लिखना प्रारंभ किया।

मेरा पहला उपन्यास 'मिन्नी' था जो उत्तर गुजरात के एक अखबार में लगातार छह मंथ तक प्रकाशित हुआ। 

उसने मेरा हौसला बुलंद कर दिया। उसी दौरान इ.स. २००० में काल-कलंक लिखी गई।


प्रश्न -   हॉरर आपकी पसंदीदा लेखन शैली है। आपकी किताब काल कलंक भी पाठकों ने हाथों हाथ ली है, सोशल मीडिया में भी इसकी  काफी चर्चा है?  हॉरर लेखन में क्या मुख्य चुनोतियाँ होती है। अपने विचार साँझा कीजिये।

उत्तर - जहां तक मेरा ख्याल है हॉरर कहानी जब तक पाठक को डरावने में कामयाब नहीं होती तब तक आप सफल नहीं है। हॉरर कहानी लिखने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। सोच समझकर हर सीन को कहानी में ऐसे ढाला जाता है कि पढ़ने वालों को सब कुछ नया और हृदय में डर की सिहरन दौडाने वाला हो। मैं कभी किसी की बुराई नहीं करता लेकिन जब कोई हॉरर कहानी मुझे निराश करती है तब मैं झुंझला उठता हूँ। फिर अपने तरीके से कुछ हटके लिखने की कोशिश करता हूँ जिसमें बाबाओं और सिर्फ भूत प्रेत का नाम न हो लेकिन दिल को थर्रा देने वाला भय हो। 


प्रश्न -  आप मूल रूप से गुजराती साहित्य लिखते आ रहे है। क्या काल कलंक से पहले भी आपकी कोई हिंदी किताब प्रकाशित हुई है? और  अपनी मात्रभाषा गुजराजी से हटकर हिंदी भाषा में लिखने में आपको किन प्रमुख चुनोतियाँ का सामना करना पड़ता है?

उत्तर -ऑनलाइन पोर्टल पर मैंने गुजराती और हिंदी दोनों लैंग्वेज में हाथ आजमाया है इसलिए काल-कलंक  को ट्रांसलेट करने में मुझे कोई परेशानी नहीं आई। 

गुजराती में अब तक पांच उपन्यास (खौफ, कठपुतली, नरकंकाल, मुर्दाघर, जिन्न की दुल्हन) हार्ड कॉपी में प्रकाशित हो चुके हैं और पांच उपन्यास कतार में है। 

'जिन्न की दुल्हन' को भी शोपिजेन ने पब्लिश किया है। 'दास्तान और वो कौन थी' आने वाले है। 



प्रश्न -  लेखन में शोध को कितना महत्व देते है आप? काल कलंक लिखने में आपने कितना शोध कार्य किया?

उत्तर - लेखन में शोध अति आवश्यक है। कहानी भले ही काल्पनिक हो लेकिन छोटी से छोटी बात की जानकारी के साथ लिखी गई कहानी से पाठक हर सीन का जैसे साक्षात्कार करता है।

काल-कलंक का आईडिया मुझे  'द ममी' फिल्म के वह कीड़े वाले सीन को देखकर आया था, जो एक ही पल में जिंदा इंसान को कंकाल बना देते हैं।

फिर क्या था दिमाग ने ताना-बाना बुना और जन्म हुआ एक हैरतअंगेज कथानक का। 


प्रश्न - आगामी प्रोजेक्ट क्या है। पाठकों को आगे क्या नया मिलने वाला है?

ANS: मेरी गुजराती कहानी मिन्नी का सीक्वल लिखने में व्यस्त हूँ जो साइंस और सुपर नेचरल शक्तियों का मिश्रण है, ऐसी अद्भुत शक्तियां जो हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों में पाई जाती थी। 


प्रश्न -  हॉरर के अलावा क्या आप किसी दूसरी शैली की किताब लिखना चाहोगे?

उत्तर -: हॉरर के अलावा मैंने 'लव स्टोरी, सामाजिक कहानियां और कठपुतली जैसा सस्पेंस उपन्यास भी लिखा है जो हार्ड कॉपी में गुजराती में उपलब्ध है। और आगे भी जरूर कुछ और और से हटकर लिखना चाहूंगा।


प्रश्न -  एक पाठक के रूप में आप कैसा साहित्य पढ़ना पसन्द करते है। अपने पसंदीदा लेखकों के बारे में कुछ बताइये।

उत्तर - मुझे हर तरह का साहित्य पसंद है। बस वह साहित्य होना चाहिए। पसंदीदा लेखकों की कतार लंबी है। हिंदी में वेद प्रकाश शर्मा, अनिल मोहन, परशुराम सर, सुरेंद्र मोहन जी, गुलशन नंदा, प्रेमचंद जी कुछ गुजराती राईटर भी है जिसमें अश्विनी भट्ट हरकिशन मेहता, प्रदीप पंड्या कुंदनिका कपाड़िया जी प्रियकांत परीख, धर्मेश भाई गांधी, गौतम शर्मा, उमंग चावडा सर नजीर खान पठान, के उपन्यास काफी पसंद है।

अब तो सबको पढ़ते हैं काफी अच्छे लेखक फ्लाईड्रिम पब्लिकेशन और शोपिजेन दोनो जगह से पढने को मिल रहे है।  सब से कुछ न कुछ सीखता रहता हूँ।


प्रश्न -  लेखन के अलावा आप और किन चीजों में रुचि रखते हो?

उत्तर - लिखना के अलावा मुझे पढ़ना,हॉरर मूवी देखना और स्विमिंग बहुत पसंद है। 


प्रश्न -  अंत मे अपने पाठकों को क्या संदेश देना चाहोगे?

उत्तर - जिंदगी बहुत छोटी है और इंसान का जन्म हमें सिर्फ एक बार मिलता है। किसी भी इंसान के होंठों की मुस्कान बनने का प्रयास करें। जिंदगी बहुत खूबसूरत और सुकून भरी लगेगी।


साक्षात्कार के लिए अपना अमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद ! आशा करता हूँ आपकी कलम यूं ही चलती रहेगी और पाठकों का प्यार आप  पर यूं ही बरसता रहेगा ।

साबिर जी की किताब काल कलंक आप इस लिंक से खरीद सकते हैं !



काल -कलंक 

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4 टिप्पणियाँ

  1. वाह एक गुणी लेखक से रूबरू होकर दिल प्रसन्न हो गया

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    1. साक्षात्कार पढ़ने के लिए धन्यवाद सर

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  2. रोचक साक्षात्कार रहा। कालकलंक पढ़ने की इच्छा है। जल्द ही पढता हूँ।

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